2007 की शुरुआत भारतीय क्रिकेट के लिए एक अंधेरे दौर जैसी थी। वेस्टइंडीज में हुए 50 ओवर के वर्ल्ड कप में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भारत बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर पहले ही दौर में बाहर हो गया था। देश भर में गुस्सा था। जब सितंबर 2007 में दक्षिण अफ्रीका में पहला आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप शुरू हुआ, तो सचिन, गांगुली और द्रविड़ ने इसमें न खेलने का फैसला किया और कमान सौंपी गई 26 साल के लंबे बालों वाले विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी को।
टूर्नामेंट के 3 अविस्मरणीय पल
1. पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक 'बॉल-आउट' (Bowl-Out)
ग्रुप मैच में भारत और पाकिस्तान का मैच टाई हो गया। उस समय सुपर ओवर नहीं बल्कि फुटबॉल की पेनल्टी जैसा बॉल-आउट नियम था, जिसमें खाली स्टंप्स पर गेंद मारनी थी। धोनी के चतुर आइडिया पर भारत ने सहवाग, हरभजन और रॉबिन उथप्पा को चुना (जिन्होंने स्टंप्स उड़ाए), जबकि पाकिस्तान के यासिर अराफात, उमर गुल और शाहिद अफरीदी तीनों चूक गए। भारत 3-0 से जीता!
2. युवराज सिंह के 6 गेंदों पर 6 छक्के (Kingsmead, Durban)
इंग्लैंड के खिलाफ मैच में एंड्रयू फ्लिंटॉफ से बहस के बाद युवराज सिंह गुस्से में थे। गेंदबाज आए 21 साल के स्टुअर्ट ब्रॉड। युवराज ने ब्रॉड के उस ओवर की सभी 6 गेंदों को मैदान के बाहर भेजकर मात्र 12 गेंदों में टी20 इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक जड़ दिया!
3. 24 सितंबर 2007: जोहान्सबर्ग का फाइनल
फाइनल में भारत ने गौतम गंभीर के 75 और रोहित शर्मा के 30 रनों के दम पर 157 रन बनाए। पाकिस्तान की तरफ से मिस्बाह-उल-हक मैच खींच रहे थे। आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे। जोगिंदर शर्मा ने दूसरी गेंद पर छक्का खाया, लेकिन तीसरी गेंद पर मिस्बाह ने फाइन लेग के ऊपर स्कूप शॉट खेला और शॉर्ट फाइन लेग पर एस. श्रीसंत ने कैच लपक लिया!
भारत 5 रनों से जीतकर पहला टी20 विश्व चैंपियन बन गया और यहीं से जन्म हुआ 'आईपीएल' (IPL) और भारतीय क्रिकेट के नए स्वर्णिम युग का।