जब 145 किमी/घंटे की रफ्तार से आ रही क्रिकेट की गेंद हवा में अचानक अंदर या बाहर मुड़ती है, तो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों के पास भी कोई जवाब नहीं होता। इसे कहते हैं स्विंग गेंदबाजी (Swing Bowling)। लेकिन हवा में गेंद क्यों मुड़ती है? इसके पीछे बर्नौली का सिद्धांत और एयरोडायनामिक्स काम करता है।
पारंपरिक स्विंग (Conventional Swing) कैसे होती है?
नई गेंद से पारंपरिक स्विंग कराने के लिए सीम की स्थिति और गेंद की पॉलिश का इस्तेमाल किया जाता है:
- आउटस्विंग (Outswing): जब गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज से दूर (स्लिप्स की तरफ) जाती है। इसमें सीम को स्लिप की दिशा में तिरछा रखा जाता है।
- इनस्विंग (Inswing): जब गेंद बल्लेबाज के पैड या स्टंप्स की तरफ अंदर आती है। इसमें सीम लेग-स्लिप या फाइन-लेग की तरफ होती है।
- हवा का दबाव: गेंद की उभरी हुई सीम हवा के प्रवाह (Airflow) को दो भागों में बांटती है। जिस तरफ हवा की गति तेज होती है, वहां दबाव कम होता है और गेंद उसी तरफ मुड़ जाती है।
रिवर्स स्विंग क्या है? (What is Reverse Swing?)
जब गेंद 30-40 ओवर पुरानी हो जाती है, तो फील्डर गेंद के एक तरफ को पसीने और थूक (अब पसीना) से चमकाते रहते हैं और दूसरे हिस्से को खुरदुरा (Rough) छोड़ देते हैं।
सामान्य तौर पर गेंद चमकती हुई दिशा से खुरदुरी दिशा की तरफ स्विंग होनी चाहिए। लेकिन जब गेंदबाज 140 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंद फेंकता है, तो खुरदुरे हिस्से पर पहले टर्बुलेंट लेयर बन जाती है और गेंद अप्रत्याशित रूप से चमकदार हिस्से की तरफ मुड़ने लगती है! इसे ही रिवर्स स्विंग कहते हैं।
रिवर्स स्विंग के जनक और दिग्गज
रिवर्स स्विंग की खोज 1970 के दशक में पाकिस्तान के सरफराज नवाज ने की थी। बाद में इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनिस और भारत के जहीर खान व मोहम्मद शमी ने इसमें महारत हासिल की। 2005 की एशेज में साइमन जोन्स और एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने रिवर्स स्विंग के दम पर ऑस्ट्रेलिया को घुटनों पर ला दिया था।