अगर भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे मजबूत टेस्ट टीमों में से एक है, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय भारत के प्रमुख घरेलू फर्स्ट-क्लास टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) को जाता है। 1934 से लगातार खेला जा रहा यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट की रीढ़ (Backbone) है, जहाँ 4-दिवसीय मैचों में खिलाड़ियों की तकनीक, धैर्य और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा होती है।
नामकरण और इतिहास
रणजी ट्रॉफी का नाम भारत के पहले महान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर कुमार श्री रणजीतसिंह जी (के. एस. रणजीतसिंह जी / 'रणजी') के नाम पर रखा गया, जिन्होंने 1890 के दशक में इंग्लैंड और ससेक्स की तरफ से खेलकर 'लेग ग्लांस' शॉट का आविष्कार किया था। पहला रणजी मैच 4 नवंबर 1934 को मद्रास और मैसूर के बीच खेला गया था।
टूर्नामेंट का आधुनिक फॉर्मेट
- टीमें: भारत के विभिन्न राज्यों, रेलवे और सर्विसेज को मिलाकर कुल 38 टीमें इसमें भाग लेती हैं।
- एलीट और प्लेट ग्रुप: टीमों को एलीट ग्रुप (चार समूहों में 32 टीमें) और प्लेट ग्रुप (पूर्वोत्तर और नवोदित 6 टीमें) में बांटा जाता है।
- मैच अवधि: लीग और नॉकआउट (क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल) मैच 4 दिनों के होते हैं, जबकि फाइनल मुकाबला 5 दिनों का होता है।
- अंक प्रणाली: सीधी जीत पर 6 अंक, पारी या 10 विकेट से जीत पर 7 अंक, और मैच ड्रॉ होने पर पहली पारी में बढ़त (First Innings Lead) लेने वाली टीम को 3 अंक मिलते हैं।
मुंबई का अविश्वसनीय दबदबा
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में मुंबई (बॉम्बे) क्रिकेट टीम का दबदबा अद्वितीय है। मुंबई ने अब तक रिकॉर्ड 42 बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता है, जिसमें 1958 से 1973 तक लगातार 15 वर्षों तक चैंपियन रहने का विश्व रिकॉर्ड भी शामिल है।
टीम इंडिया में चयन के लिए रणजी क्यों जरूरी है?
बीसीसीआई के सख्त निर्देश हैं कि जो भी खिलाड़ी टीम इंडिया की टेस्ट टीम में जगह बनाना चाहता है, उसे आईपीएल की चकाचौंध के बीच भी रणजी ट्रॉफी के लाल गेंद मैचों में खेलकर अपनी फॉर्म और फिटनेस साबित करनी होगी। चेतेश्वर पुजारा, यशस्वी जायसवाल और सरफराज खान जैसे खिलाड़ियों ने रणजी में रनों का अंबार लगाकर ही भारतीय टीम का दरवाजा खटखटाया।