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मंगलवार व्रत कथा, पूजा विधि व नियम: क्यों और कब करें हनुमान जी का उपवास? जानिए संपूर्ण पौराणिक कथा व मंगल दोष शांति

Hindilish टीम 08 Oct 2026 अपडेट: 08 Oct 2026 12 मिनट पढ़ें 1,852
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मंगलवार व्रत पूजन एवं श्री हनुमान जी की दिव्य सिंदूरी चौकी
मंगलवार व्रत पूजन एवं श्री हनुमान जी की दिव्य सिंदूरी चौकी

कलयुग के प्रत्यक्ष जाग्रत देव भगवान श्री हनुमान जी और मंगल देव को समर्पित मंगलवार व्रत की संपूर्ण पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, नियम और उद्यापन। जानिए क्यों और कब किया जाता है यह पावन उपवास।

विषय सूची

सनातन ज्ञानकोश • व्रत एवं साधना स्कंद पुराण • नारद पुराण • हनुमद् आराधना

मंगलवार व्रत: आत्मबल, संकट मुक्ति और मंगल दोष शांति का साक्षात अनुष्ठान

सनातन संस्कृति में मंगलवार (Tuesday) का दिन कलयुग के प्रत्यक्ष जाग्रत देव भगवान श्री हनुमान जी और नवग्रहों के सेनापति मंगल देव (Mars) की आराधना के लिए समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को शौर्य, पराक्रम, भूमि और रक्त का कारक माना गया है, वहीं हनुमान जी को 'संकटमोचक' कहा जाता है। मंगलवार का व्रत रखने से न केवल शारीरिक और मानसिक व्याधियों का नाश होता है, बल्कि जन्मकुंडली के भयानक से भयानक 'मंगल दोष' (Manglik Dosha) का भी शमन होता है। इस प्रामाणिक आलेख में जानिए मंगलवार व्रत क्यों किया जाता है, इसे कब शुरू करें, संपूर्ण पौराणिक कथा, पूजा विधि, नियम और उद्यापन की पूरी प्रक्रिया।

मंगलवार व्रत: संक्षिप्त तथ्य एवं विवरण सारिणी

समर्पित आराध्य देव भगवान श्री हनुमान जी एवं नवग्रह सेनापति मंगल देव
व्रत आरंभ का शुभ समय शुक्ल पक्ष का प्रथम मंगलवार (चैत्र, ज्येष्ठ, आश्विन अथवा मार्गशीर्ष)
व्रत की कुल संख्या कम से कम 21 मंगलवार, 45 मंगलवार अथवा 1 वर्ष (52 मंगलवार)
भोजन एवं फलाहार नियम दिन भर निराहार/फलाहार, शाम को एक बार केवल मीठा भोजन (नमक का पूर्ण त्याग)
प्रिय भोग व प्रसाद गुड़-चना, बूंदी के लड्डू, आटे का मीठा हलवा और तुलसी दल
मुख्य मंत्र ॐ हनुमते नमः | ॐ अं अंगारकाय नमः
मंगलवार व्रत पूजन एवं श्री हनुमान जी की दिव्य सिंदूरी चौकी

चित्र: श्री हनुमान जी की पवित्र सिंदूरी प्रतिमा, पंचमुखी दीपक, गुड़-चना भोग और मंगलवार व्रत कथा की पावन चौकी

1. मंगलवार का व्रत क्यों किया जाता है? (Why Fast on Tuesday?)

⚡ त्वरित उत्तर (AEO Direct Summary):

मंगलवार का व्रत मुख्य रूप से कुंडली में मंगल दोष के निवारण, अज्ञात भय, भूत-बाधा व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, संतान प्राप्ति, कर्ज मुक्ति और साहस व आत्मबल में वृद्धि के लिए किया जाता है। भगवान हनुमान जी की कृपा से साधक के जीवन के सभी अमंगल दूर होकर शुभता का संचार होता है।

सनातन धर्म में मंगलवार व्रत रखने के पीछे वैज्ञानिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक कारण निहित हैं:

  • मांगलिक दोष (Manglik Dosha) का शमन: यदि किसी जातक की जन्म पत्रिका के 1st, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में मंगल स्थित हो, तो वह मांगलिक कहलाता है। इसके प्रभाव से विवाह में अनावश्यक विलंब, पति-पत्नी में तनाव या रक्त विकार उत्पन्न होते हैं। 21 मंगलवार का व्रत रखने से मंगल देव की उग्रता शांत होती है।
  • अथाह साहस और निर्णय क्षमता: मंगल को रक्त और पराक्रम का स्वामी माना गया है। जो व्यक्ति जल्दी घबरा जाते हैं या आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, उनके भीतर मंगलवार व्रत से प्रचंड सकारात्मक ऊर्जा और निडरता का संचार होता है।
  • कर्ज (ऋण) से स्थायी मुक्ति: मंगलवार को भगवान हनुमान के साथ-साथ 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करने से वर्षों पुराने कर्ज और आर्थिक संकट से छुटकारा मिलता है।
  • संतान सुख की प्राप्ति: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त नहीं हो रहा हो, वे यदि निष्ठापूर्वक मंगलवार का व्रत रखें, तो उन्हें गुणवान और दीर्घायु संतान की प्राप्ति होती है।

2. मंगलवार व्रत कब शुरू करें और कितने व्रत रखें? (When to Start & Duration)

शास्त्रों के अनुसार किसी भी शुभ अनुष्ठान का आरंभ शुभ मुहूर्त और तिथि में ही किया जाना चाहिए:

शुक्ल पक्ष का पहला मंगलवार

व्रत का शुभारंभ हमेशा शुक्ल पक्ष (उजले पखवाड़े) के प्रथम मंगलवार से ही करना चाहिए। कृष्ण पक्ष में नया व्रत शुरू न करें।

श्रेष्ठ महीने

चैत्र (हनुमान जन्मोत्सव का माह), ज्येष्ठ (बड़ा मंगल), श्रावण, आश्विन अथवा मार्गशीर्ष का महीना व्रत शुरू करने के लिए अति उत्तम है।

संकल्प की अवधि

सामान्यतः 21 मंगलवार के व्रत का संकल्प लिया जाता है। विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु 45 मंगलवार अथवा 1 वर्ष तक व्रत रखा जाता है।

3. मंगलवार व्रत की संपूर्ण पौराणिक कथा (The Sacred Story)

मंगलवार व्रत के दिन इस पावन कथा का पठन अथवा शांत चित्त से श्रवण करना अनिवार्य माना गया है। बिना कथा श्रवण के व्रत का फल अधूरा रहता है:

ब्राह्मण केशव और धर्मपरायण अंजलि की भक्ति

प्राचीन काल में एक परम धार्मिक, विप्र कुलभूषण ब्राह्मण रहते थे, जिनका नाम केशव था। उनकी धर्मपत्नी का नाम अंजलि था। दोनों भगवान के परम भक्त और दयालु स्वभाव के थे। उनके घर में धन-वैभव की कोई कमी न थी, परंतु विवाह के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी कोई संतान नहीं थी। संतानहीन होने के कारण दोनों अत्यंत व्यथित और शोकाकुल रहते थे।

पुत्र प्राप्ति की उत्कट अभिलाषा से ब्राह्मण केशव ने वन में जाकर पवनपुत्र हनुमान जी की घोर तपस्या करने का निश्चय किया। वह वन में कुटिया बनाकर दिन-रात प्रभु के ध्यान में मग्न रहने लगा। इधर उसकी पतिव्रता पत्नी अंजलि अपने घर पर ही प्रत्येक मंगलवार को पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ हनुमान जी का व्रत रखती और संध्या समय भोग अर्पण करने के उपरांत ही आहार ग्रहण करती थी।

अंजलि का अखंड निर्जला संकल्प

एक समय की बात है, किसी आकस्मिक कारणवश मंगलवार के दिन अंजलि से भोजन बनाने में विलंब हो गया और वह सूर्यास्त से पूर्व हनुमान जी को भोग न लगा सकी। जब रात्रि हो गई, तो उसने गहरा पश्चाताप करते हुए प्रतिज्ञा ली— "हे संकटमोचन! जब तक मैं आपको अपने हाथों से भोग समर्पित नहीं कर दूंगी, तब तक मैं अन्न का एक दाना अथवा जल की एक बूंद भी कंठ से नीचे नहीं उतारूंगी।"

उसने छह दिनों तक लगातार निर्जला और निराहार रहकर प्रभु के नाम का स्मरण किया। अगला मंगलवार आते-आते भूख-प्यास से उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। सातवें दिन जब वह पूजा करने बैठी, तो अत्यधिक निर्बलता के कारण वह मूर्छित होकर गिर पड़ी।

पवनपुत्र का साक्षात प्राकट्य और मंगल का जन्म

अंजलि की ऐसी अनन्य निष्ठा और अटल भक्ति देखकर भगवान श्री हनुमान जी का सिंहासन डोल उठा। प्रभु अपने बाल स्वरूप में साक्षात प्रकट हुए और अपनी अमृतमयी दृष्टि से अंजलि को चेतना प्रदान की। हनुमान जी ने अत्यंत वात्सल्य भाव से कहा:

"उठो कल्याणी! मैं तुम्हारी निस्वार्थ और अडिग भक्ति से परम प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि तुम्हारे गर्भ से एक अत्यंत गुणवान, शूरवीर, तेजस्वी और दीर्घायु पुत्र उत्पन्न होगा, जो संसार में तुम्हारे कुल की कीर्ति पताका फहराएगा।"

वरदान देकर पवनपुत्र अंतर्ध्यान हो गए। कुछ समय बाद ब्राह्मणी ने एक अत्यंत रूपवान और तेजस्वी बालक को जन्म दिया। मंगलवार के दिन हनुमान जी के अनुग्रह से उत्पन्न होने के कारण बालक का नाम 'मंगल' रखा गया।

ब्राह्मण का संदेह और प्रभु हनुमान की दिव्य परीक्षा

कुछ वर्षों बाद जब ब्राह्मण केशव अपनी लंबी तपस्या समाप्त कर वन से घर वापस लौटा, तो उसने अपने आंगन में एक अत्यंत सुंदर बालक को क्रीड़ा करते देखा। उसने आश्चर्य और संशय से पत्नी से पूछा— "यह बालक कौन है और कहाँ से आया है?"

अंजलि ने आनंदित होकर कहा— "स्वामी! यह बालक हमारे प्रभु हनुमान जी के आशीर्वाद और मंगलवार के पावन व्रत का प्रसाद है।"

किंतु संसारी ब्राह्मण के मन में कुतर्क जाग उठा। उसने सोचा कि उसके वर्षों तक घर से दूर रहने पर पुत्र का जन्म कैसे हो सकता है? उसने अपनी पतिव्रता पत्नी पर अनुचित संदेह किया और बालक को अपने रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रच डाला।

एक दिन जब अंजलि जलाशय से जल लाने गई, तो केशव बालक मंगल को बहला-फुसलाकर गहरे कुएं/नदी के समीप ले गया और उसने बालक को पानी में धक्का दे दिया। बालक को जल में डूबता देखकर ब्राह्मण चुपचाप घर लौट आया।

घर पहुंचकर अंजलि ने व्याकुल होकर पूछा— "स्वामी! हमारा मंगल कहाँ है? वह आपके साथ गया था।" ब्राह्मण कोई बहाना गढ़ने ही वाला था कि तभी पीछे से बालक मंगल खिलखिलाता हुआ दौड़ा और पिता की जांघ से लिपट गया!

पश्चाताप और प्रभु की पावन सीख

बालक को सकुशल जीवित देखकर ब्राह्मण के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसी रात स्वप्न में भगवान हनुमान जी ने गदाधारी रूप में केशव को दर्शन दिए और गर्जना करते हुए कहा:

"अरे अज्ञानी विप्र! तूने अपनी सती-साध्वी पत्नी पर संदेह कर घोर पाप किया। यह बालक मेरी ही कृपा का साक्षात फल है। जो जन मंगलवार का निष्काम व्रत रखता है, उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तूने इसे मारने का प्रयास किया, किंतु मैंने स्वयं अपनी भुजाओं पर इसे थाम लिया।"

प्रातः जागते ही ब्राह्मण केशव की आंखों से पश्चाताप की अविरल अश्रुधारा बह निकली। उसने अपनी पत्नी के चरण पकड़कर क्षमा याचना की और बालक मंगल को गले से लगा लिया। उस दिन के बाद से ब्राह्मण दंपति ने नियमपूर्वक प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखा और अंत में समस्त भौतिक सुख भोगकर मोक्ष पद को प्राप्त किया।

4. मंगलवार व्रत की संपूर्ण पूजा विधि (Puja Vidhi Step-by-Step)

  1. प्रातः स्नान एवं संकल्प: मंगलवार के दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करें। लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर 21 या 45 मंगलवार व्रत का संकल्प लें।
  2. चौकी स्थापना: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) अथवा पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी रखें। उस पर स्वच्छ लाल रेशमी या सूती वस्त्र बिछाएं।
  3. प्रतिमा स्थापना व तिलक: चौकी पर भगवान श्री हनुमान जी की बैठी मुद्रा वाली सिंदूरी प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। चमेली के तेल में नारंगी सिंदूर घोलकर हनुमान जी को तिलक लगाएं या चोला अर्पित करें।
  4. पुष्प व धूप-दीप: प्रभु को लाल कनेर, लाल गुलाब या गुड़हल के ताजे फूल अर्पित करें। गाय के शुद्ध घी अथवा चमेली के तेल का पंचमुखी दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूप जलाएं।
  5. भोग अर्पण: तांबे या पीतल की थाली में भुना हुआ चना और गुड़, बूंदी के लड्डू या आटे का मीठा हलवा रखें। ध्यान रहे: भोग में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) अनिवार्य रूप से रखें।
  6. कथा एवं चालीसा पाठ: शांत मन से बैठकर मंगलवार व्रत कथा का पाठ करें। इसके पश्चात श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें।
  7. आरती एवं क्षमा याचना: कर्पूर से आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए प्रभु से क्षमा याचना करें।

5. व्रत के कठोर नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं? (Rules & Diet)

✅ क्या करें (Do's)

  • दिन में केवल एक बार सूर्यास्त के बाद मीठा भोजन ग्रहण करें।
  • गेहूं के आटे की मीठी रोटी, हलवा, खीर, दूध अथवा मौसमी मीठे फल खाएं।
  • पूरे दिन मन में 'श्री राम' और 'ॐ हनुमते नमः' मंत्र का मानसिक जप करें।
  • वानरों अथवा गाय को गुड़ और चना खिलाना अत्यंत पुण्यदायी है।

❌ क्या न करें (Don'ts)

  • नमक का पूर्ण त्याग: साधारण नमक और सेंधा नमक दोनों का सेवन वर्जित है।
  • प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा या अन्य तामसिक पदार्थों का स्पर्श भी न करें।
  • मंगलवार के दिन बाल, दाढ़ी-मूंछ या नाखून काटना सख्त वर्जित है।
  • मंगलवार को काले वस्त्र पहनने और लोहे का नया सामान खरीदने से बचें।

6. मंगलवार व्रत का उद्यापन कैसे करें? (Udyapan Vidhi)

जब आपके संकल्पित 21 अथवा 45 मंगलवार पूर्ण हो जाएं, तब अगले मंगलवार को विधिपूर्वक उद्यापन संपन्न करना चाहिए:

  • हवन अनुष्ठान: प्रातः सामान्य पूजा के बाद आम की समिधा और हवन सामग्री में गाय का घी, गुड़, बूंदी और काले तिल मिलाकर 108 बार 'ॐ हनुमते नमः स्वाहा' मंत्र से आहुति दें।
  • चोला अर्पण: श्री हनुमान मंदिर जाकर प्रभु को नारंगी सिंदूर व चमेली का तेल, लाल लंगोट, जनेऊ और तुलसी की माला अर्पित करें।
  • बटुक/ब्राह्मण भोज: 21 छोटे बालकों (बटुकों) या योग्य ब्राह्मण को घर बुलाकर शुद्ध घी का हलवा, पूड़ी और खीर का भोजन कराएं।
  • दान-दक्षिणा: ब्राह्मणों को लाल वस्त्र, तांबे का पात्र और यथाशक्ति दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करें।

7. श्री हनुमान जी की पावन आरती व सिद्ध मंत्र

॥ आरती श्री हनुमान लला की ॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्रान उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरति गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥

विशेष मंगल दोष शांति मंत्र:

ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम्॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मंगलवार का व्रत क्यों रखा जाता है?
मंगलवार का व्रत मुख्य रूप से कुंडली में मंगल दोष की शांति, अज्ञात भय व संकटों से मुक्ति, पराक्रम व साहस में वृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
मंगलवार का व्रत कब शुरू करना चाहिए?
मंगलवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है। विशेष रूप से चैत्र, ज्येष्ठ अथवा मार्गशीर्ष मास में शुरुआत करना अति फलदायी होता है।
मंगलवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
मंगलवार व्रत में दिन में केवल एक बार शाम की पूजा के बाद मीठा भोजन ग्रहण किया जाता है। इसमें हलवा, खीर, गेहूं के आटे की मीठी रोटी या फल खा सकते हैं। इस व्रत में नमक खाना पूर्णतः वर्जित है।
क्या महिलाएं मंगलवार का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं मंगलवार का व्रत पूरी श्रद्धा से रख सकती हैं और कथा का पाठ कर सकती हैं। केवल उन्हें हनुमान जी की प्रतिमा को स्पर्श नहीं करना चाहिए और दूर से ही प्रणाम करना चाहिए।
मंगलवार का व्रत कितने रखने चाहिए?
मंगलवार के व्रत कम से कम 21 मंगलवार तक रखने का विधान है। इसके अलावा भक्त 45 मंगलवार या 1 वर्ष (52 मंगलवार) का संकल्प लेकर भी व्रत रख सकते हैं।
मंगलवार व्रत का उद्यापन कैसे किया जाता है?
21 मंगलवार पूर्ण होने पर 22वें मंगलवार को 108 आहुतियों का हवन किया जाता है, हनुमान जी को चोला व लंगोट अर्पित की जाती है और 21 बालकों या ब्राह्मण को मीठा भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है।

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